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भारत में होती हैं आम की इतनी किस्में, जानें किस इलाके में पाए जाते हैं कौन से आम

<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”>आम हमारे देश में लगभग हर व्यक्ति को पसंद होते हैं<span class=”s1″>. </span>उनके स्वाद<span class=”s1″>, </span>मिठास और रसीलापन मन को लुभा लेता है<span class=”s1″>. </span>दिलचस्प बात ये है कि फलों का राजा कहे जाने वाले आम की कोई एक प्रजाति या किस्म नहीं होती<span class=”s1″>, </span>बल्कि ये कई वैरायटी में पाए जाते हैं<span class=”s1″>. </span>तो चलिए आज जानते हैं कि हमारे देश में किस जगह आम की कितनी किस्में पाई जाती हैं<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>देश में किस राज्य में पाई जाती हैं आम की कितनी किस्में<span class=”s1″>?</span></strong></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>पंजाब</strong><span class=”s1″>-<span class=”Apple-converted-space”>&nbsp; </span></span>पंजाब की बात करें तो वहां चौसा<span class=”s1″>, </span>दशहरी<span class=”s1″>, </span>मालदा आम प्रमुख रूप से पाए जाते हैं<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>हरियाणा</strong><span class=”s1″>- </span>चौसा<span class=”s1″>, </span>दशहरी<span class=”s1″>, </span>लंगड़ा और<span class=”s1″>&nbsp;</span>फाजिल आम हरियाणा की खासीयत है<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>राजस्थान</strong><span class=”s1″>- </span>राजस्थान में बॉम्बे<span class=”s1″>, </span>ग्रीन<span class=”s1″>, </span>चौसा<span class=”s1″>, </span>दशहरी<span class=”s1″>, </span>लंगड़ा<span class=”s1″>&nbsp;</span>आम की पैदावार होती है<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>गुजरात</strong><span class=”s1″>- </span>गुजरात में केसर<span class=”s1″>, </span>अलफांसो<span class=”s1″>, </span>राजापुरी<span class=”s1″>, </span>जमादार<span class=”s1″>, </span>तोतापुरी<span class=”s1″>, </span>नीलम<span class=”s1″>, </span>दशहरी<span class=”s1″>, </span>लंगड़ा आम मुख्य रूप से पाया जाता है<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>महाराष्ट्र</strong><span class=”s1″>- </span>महाराष्ट्र में आम की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है<span class=”s1″>. </span>यहां अलफांसो<span class=”s1″>, </span>तोतापुरी<span class=”s1″>, </span>बंगनपल्ली<span class=”s1″>, </span>पैरी<span class=”s1″>, </span>नीलम<span class=”s1″>, </span>मुलगांव<span class=”s1″>&nbsp;</span>की खेती मुख्य रूप से की जाती है<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>तमिलनाडु</strong><span class=”s1″>- </span>वहीं तमिलनाडु में अलफांसो<span class=”s1″>, </span>तोतापुरी<span class=”s1″>, </span>बंगनपल्ली<span class=”s1″>, </span>नीलम जैसी वेरायटी के आम उगाए जाते हैं<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>मध्य प्रदेश<span class=”s1″>-</span>आंध्र प्रदेश</strong><span class=”s1″>- </span>देश में आम की पैदावार में मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश का बड़ा योगदान माना जाता है<span class=”s1″>. </span>इन दोनों राज्यों के आम की दुनियाभर में मांग होती है<span class=”s1″>. </span>बंगनपल्ली<span class=”s1″>, </span>सुवर्णरेखा<span class=”s1″>, </span>नीलम<span class=”s1″>, </span>तोतापुरी किस्में होती हैं<span class=”s1″>, </span>वहीं<span class=”s1″>&nbsp;</span>मध्य प्रदेश में<span class=”s1″>&nbsp;</span>अलफांसो<span class=”s1″>, </span>बॉम्बे ग्रीन<span class=”s1″>, </span>दशहरी<span class=”s1″>, </span>फाजिल<span class=”s1″>, </span>लंगड़ा<span class=”s1″>, </span>नीलम जैसी वेरायटी के आम होते हैं<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>बंगाल</strong><span class=”s1″>- </span>बंगाल को आम का गढ़ माना जाता है<span class=”s1″>. </span>फाजिल<span class=”s1″>, </span>गुलाबखास<span class=”s1″>, </span>हिमसागर<span class=”s1″>, </span>किशनभोग<span class=”s1″>, </span>लंगड़ा<span class=”s1″>, </span>बॉम्बे ग्रीन आम होते हैं<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>उत्तर प्रदेश</strong><span class=”s1″>- </span>उत्तर प्रदेश में बॉम्बे ग्रीन<span class=”s1″>, </span>चौसा<span class=”s1″>, </span>दशहरी<span class=”s1″>, </span>लंगड़ा नाम की वेरायटी<span class=”s1″>&nbsp;</span>उगाई जाती है<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>हिमाचल प्रदेश</strong><span class=”s1″>- </span>हिमाचल प्रदेश में सेब के अलावा आमों की भी पैदावार होती है<span class=”s1″>. </span>यहां मुख्य रूप से चौसा<span class=”s1″>, </span>दशहरी<span class=”s1″>, </span>लंगड़ा आम उगाया जाता है<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p1″ style=”text-align: justify;”><strong>बिहार</strong><span class=”s1″>- </span>ग्रीन<span class=”s1″>, </span>चौसा<span class=”s1″>, </span>दशहरी<span class=”s1″>, </span>फाजिल<span class=”s1″>, </span>गुलाबखास<span class=”s1″>, </span>किशनभोग<span class=”s1″>, </span>हिमसागर<span class=”s1″>, </span>जर्दालु<span class=”s1″>, </span>लंगड़ा आम उगाया जाता है<span class=”s1″>.&nbsp;</span></p>
<p class=”p1″><strong>दुनिया का सबसे महंगा आम</strong></p>
<p class=”p1″>भारत के सबसे मंहगे आम की बात करें तो वो कोहितूर और अल्फांसो माना जाता है<span class=”s1″>, </span>जिसकी एक पीस के कीमत<span class=”s1″> 12 </span>हजार तक होती है<span class=”s1″>. </span>वहीं विश्व का सबसे मंहगा आम जापान में पैदा होने वाला मियाजाकी आम माना जाता है<span class=”s1″>. </span>इस प्रजाति के एक किलो आम की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में<span class=”s1″> 3 </span>लाख किलो प्रति ग्राम है<span class=”s1″>. </span>आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में पश्चिम बंगाल में कुछ किसान इसकी प्रीमियम किस्म की खेती करने में कामयाब रहे हैं<span class=”s1″>. </span>बता दें इस आम को इसके गहरे लाला छिलके<span class=”s1″>, </span>समृद्ध स्वाद और बेहतरीन सुगंध के लिए जाना जाता है<span class=”s1″>.</span></p>
<p class=”p2″ style=”text-align: justify;”><strong>यह भी पढ़ें: <a title=”CISF और CRPF के काम में है काफी फर्क… तो जानिए मेट्रो-एयरपोर्ट में कौन करता है सुरक्षा” href=”https://www.abplive.com/gk/what-is-the-difference-between-cisf-and-crpf-cisf-has-the-responsibility-of-security-of-these-important-places-including-the-airport-2696502″ target=”_self”>CISF और CRPF के काम में है काफी फर्क… तो जानिए मेट्रो-एयरपोर्ट में कौन करता है सुरक्षा</a></strong></p>

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